ढाई सीढ़ी की मस्जिद
- Wassup Bhopal

- Mar 5, 2017
- 1 min read
बात उस ज़माने की है जब भोपाल पर नवाब दोस्त मोहम्मद का राज हुआ करता था। हज़ारो सिपाही राज्य की सुरक्षा के लिए अपनी जान की चिंता न करते हुए किले की दीवारों पर तैनात रहते थेे। परंतु ऐसा हौसला होने के लिए खुदा की रहमत होना भी ज़रूरी है। इसी बात को ध्यान में रखकर भोपाल की पहली मस्जिद का निर्माण किया गया- “ढाई सीढ़ी की मस्जिद ” ।
फतेहगढ़ किले पर स्तिथ ढाई सीढ़ी की मज़्ज़िद।
दोस्त मोहम्मद द्वारा किले के सबसे ऊपरी हिस्से में इसका निर्माण किया गया। इसकी विशेष ढाई सीढ़िया प्राथना स्थल तक पहुचती है। इन्ही ढाई सीढ़ियों की वजह से इसका यह नाम पढ़ा। एक समय पर कुछ ही सैनिक यहाँ नमाज़ पड़ते थे जबकि बाकी शहर की सुरक्षा करते थे। जैसे जैसे समय बिता फतेहगढ़ किला जो की नवाबो की शान का प्रतीक था मिट्टि में मिल गया। परंतु ढाई सीढ़ी की मस्जिद से आज भी अल्लाह आज भी अपने बाशिदों की निगरानी कर रहे है।
नमाज़ अदा करने की जगह।
फतेहगढ़ किले पर स्तिथ ढाई सीढ़ी की मज़्ज़िद। एक छोटे से कमरे के आकार के प्राथना कक्ष के होने के कारण इसे एशिया की सबसे छोटी मस्जिद होने का दर्ज़ा हासिल है। हैरान करने वाली बात यह है के “ताज-उल- मसाजित” जो की एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद है “ढाई सीढ़ी की मज़्ज़िद” के सामने बनी है। दोनों आकार में बिलकुल भिन्न होने के बावजूद एक ही मकसद को पूरा करती है लोगो के दिलो में खुदा का विश्वास बनाये रखना जिससे वह दुनिया की हर परेशानी से लड़ सके ।
Covered by: Bhopal Travelholics
Follow us on INSTAGRAM: https://www.instagram.com/bhopaltravelholics/
Website: http://wassupbhopal.wordpress.com
Comments