||बोर्ड ऑफिस टू न्यू मार्केट वाया चिनार पार्क ||
- Wassup Bhopal

- Jul 25, 2018
- 3 min read
By: Nishant Singh Thakur
बोर्ड ऑफिस से लेकर न्यू मार्केट तक किनारे किनारे कुछ पार्क्स हैं जहां कपल्स जाना काफी पसंद करते हैं ।
वहीं चेतक ब्रिज के आसपास कहीं रहने वाला एक लड़का इंडियन कॉफी हाऊस के सामने वाले बस स्टॉप से मुँह पर डाकू जैसा कपड़ा बांधे, टी शर्ट और स्कर्ट पहने हुई लड़कीं को अपनी पल्सर पर बैठाकर सफर शुरू करता है,टाइम स्टॉपर्स के ग्रीन सिग्नल के 4-5 सेकंड पहले तेज़ी से चौराहों से गाड़ी निकालने और बेताल सी चिपकी हुई लड़की से बात करते हुए।

रास्ता खाली होता है फिर भी लड़का गाड़ी को 115 सीसी की प्लेजर की तरह चलाता हुआ एकदम से रुकता है।क्यों ?
अरे भाई आगे पुलिस खड़ी होती है और हेलमेट तो है ही नहीं, कभी भी नहीं था। एक आम आदमी की ज़िन्दगी के कुछ लम्हे तो यू-टर्न मारने में ही निकल जाते हैं।
लड़का गाड़ी मोड़ता है ऐसे जैसे ससुराल वालों को देख लिया हो,लड़कीं झल्लाती है। गाड़ी फिर वापस मुड़ती है बोर्ड ऑफिस की तरफ पर फिर लेक व्यू,केरवा, वी.आई.पी रोड जाने की बातें करते करते चिनार के सामने रुक जाती है।
चिनार पार्क-जंक यानी होता है कबाड़,कबाड़ से बने हुए हाथी,घोड़े,इंसान और भी बहुत कुछ देखने मिल जाता है यहाँ,जंग खाते हुए। सदाबहार रहती है तो सिर्फ यहाँ की घास और वो रंगबिरंगे जोड़े।
यहाँ काम करने वाले माली और गार्ड राजा भोज के वंशज लगते हैं। एक हाथ कमर पर रख दूसरे हाथ में पानी का पाईप या घास काटने वाला औजार लिए वो घूरते हैं हर चेहरे को। लड़की न्यू मार्केट से खरीदे हुए ढाई सौ के पर्स में से अपना वीवो का मोबाइल निकालती हैं और फिर एक दो सेल्फी लेकर उसे पर्स के ऊपर रख देती है। लड़का उसी बीच में उसे चूमने की कोशिश करता है,मानो घर में मेहमान आये हो और वहां उनके सामने रखे बिस्कुट में से आपने एक उठाने की कोशिश की हो,
दूर पेड़ के पीछे जानबूझकर खड़े पेड़ पर पानी डालते माली की नज़रों से बचते बचाते।
माली भी फिर भाग जाता है ये सोचकर कि बिस्कुट तो अपने ही हैं रिश्तेदार नहीं खाएंगे तो इसे ही खा लेने दो।
थोड़ी और दूर एक पारिवारिक जोड़ा है,तीस पैंतीस की उम्र का,मानों घर से ये बोलकर आया हो कि पिन्टू को स्कूल छोड़ने जाना है उसके बाद न्यू मार्केट से तकिये के खोल लेने हैं। दोनों खुश लगते हैं। इतने खुश मानो पगार बीच महीने में मिल गयी हो,घर पर बैठी अम्मा उस वक़्त दिमाग में काम नोट कर रही होती हैं बहु बाहर गयी है अब आज ओवरटाइम काम करवाना पड़ेगा। तब तक वो पल्सर वाला जोड़ा उठकर बाहर गेट पर आ जाता है और वहाँ से लड़का ,लड़की भेल खरीदकर उसे भेल पकड़ाता है फिर दोनों न्यू मार्केट निकल जाते हैं, नया पर्स लेने।ये वाला एक महीने पुराना हो गया है।

Chinar Park
वहाँ पार्क में खड़े जंक से बने जानवरों और इंसानो को अटपटा सा महसूस होता है,लोग पार्क में उन्हें कम एक दूसरे को ज्यादा निहारते हैं,इतने में शाम शाम तक एक परिवार आता पूरा परिवार बच्चों,बूढ़ों के साथ। वो शरारती बच्चें जंक पर चढ़कर उनके जीवित कर देते हैं। शाम ढ़लने लगती है और फिर एक एक करके सब शांत होने लगता है।गार्ड वनविहार में घूमने वाले लड़कों की तरह चिल्ला कर आवाज़ लगाता है किसी पेड़ या छोर पर शायद कोई शेर अभी भी बैठा हो। कोई नहीं दिखता है और वो फिर किसी पर न चिल्ला पाने का अफ़सोस लिए वापस मंदिर की तरफ लौट जाता है वहाँ बाएं तरफ लगे नल के पास चप्पल उतारकर और हाथ धोकर मंदिर में घुस जाता है।
पार्क फिर पीपल्स मॉल के सुबह सुबह वाली पार्किंग की तरह सुनसान और भयावह हो जाता हैं।
सड़क पर दस-एक गाड़ियां जो रात भर चलती हैं पार्क से मुंह मोड़कर ऐसे चलती हैं मानों कोई उधार लिया हो।
रात हो जाती है,भोज, ताल में वैसे ही खड़े रहते हैं कुछ नहीं कहते इतना भी नहीं कि यार पुलिस वाले आ जाएंगे, गाड़ी खड़ी मत करो यहां और सुनते रहते है छुट पुट हल चल रात भर ।
नोट – भोपाल के एक छोटे से हिस्से का यह छोटा सा पहलू पूरी तरह फिक्शन है, फिर भी अगर रिलेट कर पा रहें है तो अच्छा है।
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